कालिया नाग के अहंकार का हुआ मर्दन, अहिल्या उद्धार से गंगा पार तक सजी रामलीला


बक्सर पब्लिक न्यूज:- श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में ऐतिहासिक किला मैदान स्थित विशाल रामलीला मंच पर चल रहे 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव में गुरुवार को दिन में श्रीकृष्ण लीला और देर रात्रि रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्री बाल कृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों को देर रात तक भक्तिरस में डुबोए रखा।
दिन की श्रीकृष्ण लीला में कालिया नाग नाथन का मनोहारी मंचन हुआ। लीला में दिखाया गया कि कालिया नाग के विष से यमुना का जल दूषित हो गया था और उसके भय से गोकुलवासी चिंतित थे। श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को भयमुक्त करने तथा यमुना को विषमुक्त करने के लिए यमुना में प्रवेश किया। कालिया नाग ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने फनों से घेर लिया, लेकिन भगवान ने उसके बंधन से मुक्त होकर उसके फनों पर नृत्य किया और उसके अहंकार को चूर कर दिया। कालिया नाग की पत्नियों द्वारा प्रार्थना किए जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे क्षमा करते हुए यमुना छोड़कर समुद्र में चले जाने का आदेश दिया। इस प्रसंग ने अहंकार और अत्याचार पर धर्म एवं ईश्वर की विजय का संदेश दिया।
देर रात्रि रामलीला में अहिल्या उद्धार का अत्यंत मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। महर्षि विश्वामित्र के साथ बक्सर से मिथिला की ओर जाते समय भगवान श्रीराम और लक्ष्मण अहिरौली स्थित एक निर्जन आश्रम पहुंचे। जहां पत्थर रुप में शापित अहिल्या को देखा। वहां विश्वामित्र जी ने उन्हें अहिल्या की कथा सुनाई। भगवान श्रीराम के चरण-स्पर्श से अहिल्या शापमुक्त होकर अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हुईं और भगवान की स्तुति की।
इसके आगे दिखाया गया कि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने महर्षि विश्वामित्र के साथ पवित्र गंगा का स्मरण करते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाई और गंगा को पार करते हैं।आगे बढ़ने पर वह जनक जी के बगीचे में पहुंच जाते हैं. वहाँ वन का माली राजा जनक को विश्वामित्र सहित राम व लक्ष्मण जी के पहुंचने की सूचना देता है. राजा जनक तीनों को ले जाकर सुंदर सदन में ठहराते हैं और सत्कार करते हैं. इधर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण की इच्छा जान जाते हैं और उन्हें नगर दिखाने के लिए जनकपुर का भ्रमण करते हैं. और जनकपुर की सुंदरता देखते हैं. जहाँ नगर की स्त्रियां झरोखे से श्रीराम के सौंदर्य को निहारती हैं।
नगर दर्शन कर दोनों अपने गुरुदेव के पास आते हैं. जहां गुरुदेव अपनी पूजा हेतु पुष्प लाने के लिए राम व लक्ष्मण से कहते हैं. श्री राम-लक्ष्मण पुष्प वाटिका में जाते हैं जहां सीता जी से प्रथम मिलन होता है. श्री राम सीता जी के सौंदर्य का गुणगान करते हैं. सीता जी भी उन्हें निहारती हैं. श्रीराम पुष्प लेकर गुरुदेव के पास लौटते हैं।मंचन के दौरान कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय, संवाद, भक्ति संगीत और आकर्षक मंच सज्जा ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। पूरे परिसर में जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।



