OTHERS

श्री राम वन गमन, केवट प्रसंग एवं सुदामा चरित्र भाग-1 का हुआ भावपूर्ण मंचन

बक्सर पब्लिक न्यूज:- श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में ऐतिहासिक किला मैदान स्थित विशाल रामलीला मंच पर आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्री बाल कृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल द्वारा स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज जी के सफल निर्देशन में दिन में सुदामा चरित्र भाग-1 तथा देर रात्रि श्री राम वन गमन एवं केवट प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया।राम वन गमन एवं केवट प्रसंग के अंतर्गत दिखाया गया कि मंत्री सुमंत जी रथ पर श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता सीता को लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। सायं 5 बजे रामलीला मंच से निकला श्रीराम का रथ नगर भ्रमण करते हुए स्टेशन रोड स्थित कमलदह सरोवर पहुँचा, जहाँ प्रसंग के बाद रथ पुनः रामलीला मंच लौटा और शेष प्रसंगों के मंचन में दिखाया गया कि..

वन में श्रीराम की भेंट निषादराज से होती है, जो प्रभु की सेवा-सत्कार में जुट जाते हैं। श्रीराम बरगद का दूध मँगाकर उससे अपनी जटाएँ बनाते हैं। यह देखकर मंत्री सुमंत भावुक हो उठते हैं और प्रभु से अयोध्या लौटने की विनती करते हैं। श्रीराम उन्हें धैर्य बँधाकर वापस भेज देते हैं। इसके बाद प्रभु नदी पार करने के लिए केवट से नाव माँगते हैं। केवट प्रभु के चरणों की महिमा बताते हुए पहले उनके चरण पखारने की इच्छा व्यक्त करता है। प्रभु की अनुमति मिलने पर केवट उनके चरण धोकर उन्हें नाव से नदी पार कराता है।

 इस भक्तिमय प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।वहीं दिन में मंचित सुदामा चरित्र भाग-1 में दिखाया गया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की भेंट गुरु सांदीपनि के आश्रम जाते समय होती है। सुदामा के पैर में काँटा चुभने पर श्रीकृष्ण उनके पास पहुँचकर काँटा निकालते हैं और इसी घटना से दोनों की मित्रता प्रगाढ़ होती है। आगे गुरुजी द्वारा पाठ भूलने पर दोनों को वन से लकड़ियाँ लाने भेजा जाता है और साथ में चने की पोटली दी जाती है। वन में भूख लगने पर सुदामा श्रीकृष्ण के हिस्से के चने भी खा जाते हैं। इस प्रसंग के आगे की कथा में सुदामा के जीवन में दरिद्रता आने का वर्णन किया गया। दोनों लीलाओं के मंचन ने श्रद्धालुओं को भक्ति, मित्रता, त्याग और समर्पण का संदेश दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button