नंद के घर आनंद भयो, राम जन्म पर जय श्रीराम से गूंजा किला मैदान
विजयादशमी महोत्सव में नंद महोत्सव एवं ‘राम जन्म, नामकरण’ प्रसंग का भावपूर्ण मंचन


बक्सर पब्लिक न्यूज:- बक्सर आजादी-पूर्व से चली आ रही बक्सर की गौरवशाली रामलीला परंपरा के तहत श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में ऐतिहासिक किला मैदान स्थित विशाल रामलीला मंच पर आयोजित विजयादशमी महोत्सव-2026 में मंगलवार को दिन में श्रीकृष्ण लीला के अंतर्गत नंद महोत्सव तथा रात्रि में ‘पृथ्वी पुकार, राम जन्म, नामकरण’ प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया।प्रसिद्ध बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल, मथुरा-वृंदावन के कलाकारों ने मंडल स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में दोनों प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
दिन की श्रीकृष्ण लीला में दिखाया गया कि नंद बाबा के घर बालकृष्ण के जन्म का समाचार मिलते ही गोकुल में आनंद की लहर दौड़ गई। ग्वाल-बाल, गोप-गोपियां एवं ब्रजवासी बधाई देने नंद भवन पहुंचे। बधाई गीत, मंगलगान और नृत्य के बीच ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से पूरा रामलीला परिसर ब्रजमय हो उठा।रात्रि की रामलीला में ‘पृथ्वी पुकार, राम जन्म, नामकरण’ प्रसंग के अंतर्गत रावण और राक्षसों के बढ़ते अत्याचार से पृथ्वी पर धर्म संकट में पड़ जाता है। व्यथित पृथ्वी माता गौ का रूप धारण कर देवताओं के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करती हैं। देवता ब्रह्माजी के साथ भगवान विष्णु की शरण में पहुँचकर अधर्म के नाश की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विष्णु उन्हें आश्वस्त करते हैं कि वे अयोध्या में श्रीराम के रूप में अवतार लेकर रावण सहित राक्षसों का संहार करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे।जिसके बाद सभी देवता प्रसन्न होकर वहां से चले जाते हैं।
इसके बाद दिखाया गया कि अयोध्या के महाराज दशरथ राजवैभव होने के बावजूद संतान न होने की चिंता से व्यथित दशरथ गुरु महर्षि वशिष्ठ के पास पहुंचते हैं। गुरु वशिष्ठ के सुझाव पर महाराज दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ की स्वीकृति देते हैं। श्रृंगी ऋषि द्वारा विधि-विधान से यज्ञ कराया जाता है, जिसमें अग्निदेव प्रकट होकर राजा दशरथ को दिव्य हवि-प्रसाद प्रदान करते हैं।हवि-प्रसाद के प्रताप से महाराज दशरथ के यहां राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चार पुत्रों का जन्म होता है। अयोध्या में बधाइयां गूंज उठती हैं और चारों ओर उत्सव का वातावरण छा जाता है।
इसके बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों राजकुमारों के नामकरण संस्कार का प्रसंग मंचित किया गया। चारों के नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न रखे जाते हैं। भगवान श्रीराम के नामकरण का दृश्य आते ही दर्शक दीर्घा से ‘जय श्रीराम’ और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के जयघोष होने लगे। देखते ही देखते पूरा पांडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भावविभोर हो गए।नंद महोत्सव एवं श्रीराम जन्म-नामकरण के प्रसंगों ने ऐतिहासिक किला मैदान को दिनभर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक चेतना से भर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देर रात तक लीला का आनंद लए।



